जौनपुर । मानव सेवा को समर्पित मुरली फाउंडेशन द्वारा रविवार को पुलिस लाइन परिसर में एक दिवसीय सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) एवं एक्सीडेंट ट्रॉमा हैंडलिंग पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में लगभग 700 ट्रेनी रंगरूटों ने भाग लिया।
कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य:
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हृदयगति रुकने की पहचान करना
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सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) की बुनियादी तकनीक सीखना
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वयस्कों, बच्चों और शिशुओं के लिए अलग-अलग सीपीआर विधियाँ समझना
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एईडी (AED - Automated External Defibrillator) का उपयोग सीखना
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आपातकालीन स्थिति में आत्मविश्वास से कार्य करना
प्रशिक्षण का संचालन कृष्णा हर्ट केयर एंड ट्रॉमा सेंटर के प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. रोबिन सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने डमी के माध्यम से सीपीआर की तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया और बताया कि यदि समय रहते सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो 10 में से 7 व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सिंह ने दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद करने के सुरक्षित व वैज्ञानिक तरीकों जैसे—खून को रोकना, शरीर को सुरक्षित स्थान पर ले जाना, तथा प्रारंभिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया—पर भी विस्तृत चर्चा की। रंगरूटों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
सीपीआर क्या है?
सीपीआर (CPR) का पूरा नाम है Cardiopulmonary Resuscitation.
यह एक आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जो तब दी जाती है जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है या वह सांस लेना बंद कर देता है, जैसे कि:
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हार्ट अटैक (Heart Attack)
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डूबना (Drowning)
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करंट लगना
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सड़क दुर्घटना
सीपीआर में दो मुख्य क्रियाएँ होती हैं:
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Chest Compressions (छाती को दबाना):
यह दिल को कृत्रिम रूप से पंप करने का काम करता है ताकि शरीर और मस्तिष्क में रक्त संचार बना रहे। -
Rescue Breaths (सांस देना):
यह व्यक्ति के फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए किया जाता है।
सीपीआर क्यों आवश्यक है?
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जीवन बचाने के लिए:
दिल के बंद होने के बाद हर एक मिनट की देरी से जीवित रहने की संभावना 10% कम हो जाती है।
समय पर दिया गया सीपीआर मस्तिष्क और अंगों को ऑक्सीजन देता है और व्यक्ति की जान बचा सकता है। -
एम्बुलेंस के आने तक समय खरीदता है:
सीपीआर तुरंत शुरू किया जाए तो यह प्रोफेशनल मेडिकल मदद आने तक कीमती समय प्रदान करता है। -
सामान्य व्यक्ति भी दे सकता है:
सीपीआर देने के लिए डॉक्टर होना ज़रूरी नहीं। आम नागरिक भी इसे सीख कर ज़रूरत के समय किसी की जान बचा सकते हैं। -
आपदा या दुर्घटना के समय:
किसी भी जगह – घर, ऑफिस, स्कूल, बाजार या सड़क पर – अचानक हृदयगति रुकने पर पहला इलाज सीपीआर ही होता है।
कार्यक्रम निदेशक मनीष चंद्रा ने कहा कि विदेशों में सीपीआर प्रशिक्षण को कॉलेज स्तर पर अनिवार्य किया गया है और भारत में भी इस जागरूकता की अत्यधिक आवश्यकता है। मुरली फाउंडेशन के अध्यक्ष अमित कुमार पांडेय ने बताया कि संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण देकर जीवन रक्षा के लिए तैयार करना है। अगली कार्यशाला निषाद समाज के साथ आयोजित की जाएगी, ताकि जल दुर्घटनाओं में भी लोगों की जान बचाई जा सके।
इस अवसर पर एसपी नगर श्री आयुष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और पुलिसकर्मियों को इस प्रशिक्षण का पूरा लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डॉ. बृजेश कनौजिया, संजय जायसवाल, रविकांत जायसवाल, पंकज सिंह, अतुल जायसवाल, नवीन कुमार मिश्रा, अनिल मौर्य, राजेश किशोर, पीआर हेड योगेश साहू, नित्यानंद पांडेय समेत अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सचिव अजय सिंह द्वारा किया गया।

