इस केस की जांच दिल्ली पुलिस ने कैसे की, इसका अंदाजा बस इसी बात से लगा लीजिए कि हादसे के करीब 36 घंटे बाद पुलिस को पहली बार पता चला कि जो स्कूटी हादसे का शिकार हुई, उस स्कूटी पर एक नहीं बल्कि दो लड़कियां सवार थी. उस रात दिल्ली की पथरीली सड़क पर पूरे 12 किलोमीटर तक केवल अंजलि को ही नहीं घसीटा गया, बल्कि उसकी लाश के साथ ही दिल्ली पुलिस की साख भी घिसटती चली गई. फिर इस केस की जांच दिल्ली पुलिस ने कैसे की, इसका अंदाजा बस इसी बात से लगा लीजिए कि हादसे के करीब 36 घंटे बाद पुलिस को पहली बार पता चलता है कि जो स्कूटी हादसे का शिकार बनी, उस स्कूटी पर एक नहीं बल्कि दो लड़कियां सवार थी. ये अंजलि की वो दोस्त निधि थी, जो इस हादसे की सबसे अहम चश्मदीद भी है.
दिल्ली के सुल्तानपुरी
से कंझावला के
बीच मारुति बलेनो
कार के पहियों
तले 12 किलोमीटर तक घसीटे
जाने के बाद
मुर्दा बन चुकी
अंजलि की लाश
तब एसजीएम हॉस्पीटल
के मुर्दाघर में
पड़ी थी. पोस्टमॉर्टम
होना अभी बाकी
था. लेकिन पोस्टमॉर्टम
होने से पहले
ही आउट ड्रिस्ट्रिक
के डीसीपी बाकायदा
कैमरे पर ऐलान
कर चुके थे.
ऐलान ये कि
ना तो अंजली
का कत्ल हुआ
है और ना
उसके साथ रेप
हुआ है.
3 जनवरी 2023
अब जरा सोचिए जिस जिले में ये हादसा हुआ, उस जिले के सबसे बड़े पुलिस अफसर यानी डीसीपी ने बिना किसी जांच पड़ताल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अंजलि की मौत को एक मामूली सड़क हादसा बता कर एक तरह से केस ही खत्म कर दिया था. जबकि हुआ यूं कि अंजलि का पोस्टमॉर्टम दो जनवरी की दोपहर के बाद शुरू हुआ. पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट 3 जनवरी की सुबह मिली. इस रिपोर्ट में मौत की वजह चोट बताई गई. साथ ही ये भी बताया गया कि अंजलि के साथ रेप नहीं हुआ है.
अपनी कहानी से पलटी पुलिस
इस पूरे केस में दिल्ली पुलिस ने कैसे काम किया, काम किया भी कि नहीं किया और फिर मीडिया और लोगों के गुस्से के बाद जो कदम उठाया, वो अपने आप में बेहद शर्मनाक है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जो पहली एफआईआर दर्ज की, उसमें ये लिखा कि अंजलि स्कूटी पर अकेले जा रही थी. कार से टक्कर हुई और फिर कार उसे घसीटती हुई ले गई. दो जनवरी की रात तक इसी एफआईआर की यही कहानी दिल्ली पुलिस का हर छोटा बड़ा अफसर दोहराता रहा. लेकिन फिर 2 जनवरी की देर रात और 3 जनवरी की सुबह खुद पुलिस अपनी ही कहानी अपनी ही एफआईआर में लिखी सब बातों से पलट गई.
36 घंटे तक पुलिस ने कुछ नहीं किया !
और पुलिस इसलिए पलटी क्योंकि अंजलि की मौत के करीब 36 घंटे बाद सचमुच दिल्ली पुलिस पहली बार काम कर रही थी. शुरुआती 36 घंटे पुलिस ने कुछ नहीं किया. जैसा अमूमन वो रोड एक्सीडेंट के हर मामले में किया करती है. दिल्ली पुलिस की एफआईआर के मुताबिक अंजलि की दुर्घटनाग्रस्त स्कूटी 1 जनवरी की देर रात 2 बजकर 18 मिनट पर मिली थी. इसके करीब दो घंटे बाद तड़के 4 बजकर 11 मिनट पर अंजलि की लाश मिली. सुबह के 6 बजते-बजते लाश की शिनाख्त अंजलि की शक्ल में हो चुकी थी. पुलिस की टीम अंजलि के घरवालों से संपर्क भी कर चुकी थी. फिर इसके बाद वो हाथ पे हाथ धर कर बैठ गई. अगले 36 घंटों तक यूं ही बैठी रही.
गृह मंत्रालय से दिल्ली पुलिस को मिली फटकार
और इस दौरान हुआ यूं कि 12 किलोमीटर तक मोटरकार के पहियों तले एक लड़की के घसीटे जाने की दर्दनाक मौत हर न्यूज चैनल पर हेडलाइन बन चुकी थी. 2023 के पहले ही दिन की ये सबसे बड़ी खबर बन चुकी थी. लोग सड़कों पर उतर आए थे. राजनीति अलग शुरू हो चुकी थी. लोगों के गुस्से को देखते हुए गृह मंत्रालय को बीच में कूदना पड़ा. गृह मंत्रालय से दिल्ली पुलिस को फटकार लगी. फिर आनन- फानन में 2 जनवरी की रात मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर के नाम एक लेटर जारी किया. इसमें हुक्म दिया गया कि मामले की पूरी जांच फौरन हो और इस जांच की जिम्मेदारी सीनियर आईपीएस अफसर शालिनी सिंह को दी जाए.
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दी अंजलि
दिल्ली वालों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस अब गृह मंत्रालय के भी निशाने पर थी. लिहाजा 36 घंटे बाद 2 जनवरी की रात अचानक दिल्ली पुलिस की नींद टूटी. आनन-फानन में पुलिस की अलग-अलग टीमें जांच में जुट जाती हैं. कायदे से जो जांच उन्हें 36 घंटे पहले करनी चाहिए थी. अंजलि की कॉल रिकॉर्ड और एक्सीडेंट के पूरे रूट की एक-एक सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाता है. मेहनत रंग लाती है. 2 सीसीटीवी फुटेज में अंजलि नजर आती है. तस्वीरें और टाइमिंग मैच कर रही थी.
93 सेकंड की प्रेस कॉन्फ्रेंस
इसी के बाद दिल्ली पुलिस 3 जनवरी की सुबह अपनी एफआईआर से अलग एक नई कहानी लेकर सामने आती है. स्पेशल कमिश्नर खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं. लेकिन वो सिर्फ 93 सेकंड बोलते हैं. अपनी बात खत्म करते ही बिना रिपोर्टर के सवालों के जवाब दिए कुर्सी से उठ कर चल पडते हैं.
दिल्ली पुलिस की करतूत
पहली बार दिल्ली पुलिस ये खुलासा करती है कि हादसे के वक्त अंजलि अकेली नहीं थी. बल्कि उसके साथ एक दोस्त थी. इतना ही नहीं इसके बाद दिल्ली पुलिस बाकायदा मीडिया को दो सीसीटीवी फुटेज की तस्वीरें भी चुपचाप बांट देती है. अब अपनी कमियों को छुपाने के लिए पुलिस केस को कहीं और ले जा रही थी. अंजली की मौत कैसे हुई? कैसे वो 12 किलोमीटर तक घिसटती रही? इन सवालों का जवाब देने की बजाय पुलिस खुद ही लीक किए गए सीसीटीवी फुटेज के जरिए अंजलि और उसकी दोस्त का चरित्र हनन करने की कोशिश करने लगती है.
सीसीटीवी फुटेज में दर्ज
हैं दोनों की
तस्वीरें
रात डेढ़ बजे तक होटल के कमरे में थी अंजलि और निधि
सीसीटीवी फुटेज की तस्वीरों में अंजलि के नजर आने के बाद पुलिस की टीम इस होटल में पहुंचती है. पूछताछ करती है. पूछताछ में पता चलता है कि 31 दिसंबर की शाम साढ़े सात बजे से लेकर रात के 1.30 बजे तक अंजलि और उसकी दोस्त इसी होटल में थी. आजतक की टीम भी पड़ताल के लिए उस होटल में पहुंची. हमारे संवाददाता ने इस होटल के मैनेजर अनिल से बातचीत की.
बाहर मिलने आए थे
कुछ लड़के
सीसीटीवी में कैद अंजलि की आखिरी तस्वीर
सीसीटीवी फुटेज की तस्वीरों में अंजलि के साथ उसकी एक और दोस्त नजर आ रही है. ये तस्वीरें उसी होटल के बाहर की हैं. लेकिन तस्वीरें रात करीब 1.30 बजे की हैं. अंजलि की दोस्त तब स्कूटी चला रही थी. अंजलि उससे कुछ बातें कर रही हैं. तभी उन दोनों के करीब एक शख्स भी पहुंचता है. कुछ देर के लिए तीनों की बातचीत होती है. इतनी देर में इन तीनों से कुछ दूर खड़ा और युवक उनके पास पहुंचता है. लेकिन तब तक अंजलि और उसकी दोस्त स्कूटी लेकर वहां से निकल जाती हैं. उनके जाने के बाद दोनों युवक भी बाइक पर निकल जाते हैं.
रात डेढ़ बजे तक होटल के कमरे में थी अंजलि और निधि
सीसीटीवी फुटेज की तस्वीरों में अंजलि के नजर आने के बाद पुलिस की टीम इस होटल में पहुंचती है. पूछताछ करती है. पूछताछ चलता है कि 31 दिसंबर की शाम साढ़े सात बजे से लेकर रात के 1.30 बजे तक अंजलि और उसकी दोस्त इसी होटल में थी. आजतक की टीम भी पड़ताल के लिए उस होटल में पहुंची. हमारे संवाददाता ने इस होटल के मैनेजर अनिल से बातचीत की. बाहर मिलने आए थे कुछ लड़के होटल मैनेजर के मुताबिक अंजलि और उसकी दोस्त ने अपने नाम पर ही कमरा बुक कराया था. लेकिन उनके कमरे में कोई लड़का नहीं आया था. कमरा लेने के करीब दो ढाई घंटे बाद अंजलि और उसकी दोस्त में किसी बात पर झगड़ा भी हुआ था. अंजलि और उसकी दोस्त से मिलने होटल के बाहर कुछ लड़के जरूर आए थे. कुछ देर के लिए वो अंजलि के कमरे में भी गए लेकिन फौरन निकल गए. सीसीटीवी में कैद अंजलि की आखिरी तस्वीर
दिल्ली पुलिस की तरफ से लीक की गई दूसरी सीसीटीवी फुटेज सुल्तानपुरी थाने से कुछ सौ मीटर दूर कृष्ण विहार इलाके की है. तस्वीर रात 2 बजकर 10 मिनट की है. इस तस्वीर में एक स्कूटी नजर आती है. यहां स्कूटी अब अंजलि चला रही थी. जबकि पीछे उसकी दोस्त बैठी थी. ये शायद जिंदा अंजलि की आखिरी तस्वीर है. इसके बाद की अंजलि की कोई और तस्वीर किसी भी सीसीटीवी कैमरे में नजर नहीं आई. यानी अंजलि के साथ जो कुछ भी हुआ इसके आगे हुआ. यानी रात 2 बजकर 10 मिनट के बाद हुआ.
2 बजकर 10 मिनट के बाद हुई वारदात
वारदात के चश्मदीद दीपक के मुताबिक उसने मारुति बलेनो कार के पहियों तले अंजलि की लाश तड़के 3 बजकर 18 मिनट पर देखी थी. उसी वक्त उसने पीसीआर को कॉल किया था. यानी ये साफ है कि अंजलि के साथ जो कुछ हुआ वो 2 बजकर 10 मिनट के बाद और 3 बजकर 18 मिनट से पहले हुआ. पर यहां सवाल ये है कि स्कूटी पर अंजलि और उसकी दोस्त दोनों सवार थे, मगर कार के पहियों तले सिर्फ अंजलि मिली.
निधि से पूछताछ कर चुकी है दिल्ली पुलिस
तो दिल्ली पुलिस के मुताबिक अंजलि की दोस्त उसे मिल चुकी है. उससे शुरुआती पूछताछ भी हो चुकी है. अंजलि की दोस्त के बयान के मुताबिक होटल से निकलने के बाद अंजलि की स्कूटी एक कार से जा टकराई थी. अंजलि दूसरी तरफ गिरी और उसकी दोस्त दूसरी तरफ. अंजलि की दोस्त को मामूली चोटें आईं. मगर मौके पर उसे अंजलि नजर नहीं आई. अंजलि की दोस्त अपने घर लौट गई. बिना ये पता कि कि अंजलि के साथ क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक ये थी घटना
बकौल दिल्ली पुलिस कार में सवार पांच लोगों ने अब तक जो बताया है, उससे हादसे की तस्वीरें कुछ-कुछ साफ हो गई हैं. पुलिस के मुताबिक पांचों आरोपियों में से एक दीपक ने बताया कि वो कार चला रहा था. मनोज मित्तल आगे उसकी बगलवाली सीट पर बैठा हुआ था. पीछे की सीट पर बाकी तीनों बैठे थे. कृष्ण विहार में शनि बाजार रोड़ पर उनकी कार ने एक स्कूटी को टक्कर मार दी. स्कूटी पर सवार लड़की गिर गई. पांचों आरोपी डरकर वहां से कंझावला की तरफ भाग गए. उन्होंने कंझावला रोड पर जोंटी गांव के नजदीक कार रोकी तो कार के नीचे लड़की दिखाई दी. पांचों लड़कों ने उस लड़की को कार से खींचकर कार के निचले हिस्से से बाहर निकाला और वहीं सड़क पर छोड़ कर वहां से निकल गए और कार मालिक आशुतोष के घर पहुंच गए. वहां गाड़ी खड़ी करने के बाद सब अपने-अपने घर लौट गए.
उस रात कहां थी पुलिस ?
अंजलि या उसके दोस्त की कहानी चाहे कुछ भी हो. उनकी जाति जिंदगी में जो भी हो. मगर दिल्ली पुलिस इस सवाल से नहीं भाग सकती कि 31 दिसंबर की रात तीन-तीन थानों की सीमाओं के बीच करीब 12 किलोमीटर तक एक लड़की कार के नीचे घिसटती रही और पूरे रास्ते एक भी पुलिसवाला या एक भी पीसीआर की जिप्सी उसे देख नहीं पाई. जबकि 31 दिसंबर की रात दिल्ली पुलिस की सड़कों पर दिल्ली पुलिस के दावों के मुताबिक सबसे ज्यादा सख्ती भी थी और पुलिसवाले भी.
दिल्ली पुलिस को देने
हैं सवालों के
जवाब
दिल्ली पुलिस इस सवाल से भी नहीं भाग सकती कि हादसे के बाद अगले 36 घंटों तक उसने कुछ नहीं किया. वो तो जब मीडिया, जनता और गृह मंत्रालय का दबाव पड़ा तब 36 घंटे बाद कहीं जाकर पुलिस ने अपनी जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस इस सवाल को भी नहीं टाल सकती कि किसी हादसे के फौरन बाद बिना जांच पूरी किए, बिना डॉक्टरों की रिपोर्ट आए, बिना पोस्टमॉर्टम हुए वो मौत की वजह या रेप होने या ना होने का ऐलान कैसे कर सकती है? इस केस में अब भी बहुत से ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब दिल्ली पुलिस को देने हैं. लड़की दिखाई दी. पांचों लड़कों ने उस लड़की को कार से खींचकर कार के निचले हिस्से से बाहर निकाला और वहीं सड़क पर छोड़ कर वहां से निकल गए और कार मालिक आशुतोष के घर पहुंच गए. वहां गाड़ी खड़ी करने के बाद सब अपने-अपने घर लौट गए.
उस रात कहां थी पुलिस ?
अंजलि या उसके दोस्त की कहानी चाहे कुछ भी हो. उनकी जाति जिंदगी में जो भी हो. मगर दिल्ली पुलिस इस सवाल से नहीं भाग सकती कि 31 दिसंबर की रात तीन-तीन थानों की सीमाओं के बीच करीब 12 किलोमीटर तक एक लड़की कार के नीचे घिसटती रही और पूरे रास्ते एक भी पुलिसवाला या एक भी पीसीआर की जिप्सी उसे देख नहीं पाई. जबकि 31 दिसंबर की रात दिल्ली पुलिस की सड़कों पर दिल्ली
पुलिस के दावों के मुताबिक सबसे ज्यादा सख्ती भी थी और पुलिसवाले भी.
दिल्ली पुलिस को देने
हैं सवालों के
जवाब
