न कीटनाशक, न खाद-पानी...धान की फसलों का ये रहा असली शुभचिंतक




धान की खेती के सुझाव: खेती में इसके यूज को कम ही लोग जानते हैं, लेकिन ये है बड़ी अचूक. वो काम कर दिखाती है जो महंगे से महंगे कीटनाशक नहीं कर सकते. बस तरीका सही होना चाहिए, फिर देखिए कमाल.

खेती में कई बार ऐसे उपाय होते हैं जो न तो बाजार में दिखते हैं, न ही बड़ी कंपनियाँ जिनका विज्ञापन करती हैं — लेकिन असर ऐसा कि बड़े-बड़े ब्रांड्स फीके पड़ जाएं।

धान की फसल में ऐसा ही एक छुपा हुआ चैंपियन है — मेंढ़क।

जी हाँ! मेंढ़क।
खेती में इसके यूज को कम ही लोग जानते हैं, लेकिन ये है बड़ी अचूक।
वो काम कर दिखाता है जो महंगे से महंगे कीटनाशक नहीं कर सकते।
बस तरीका सही होना चाहिए, फिर देखिए कमाल।

कैसे करता है मेंढ़क कमाल?

  • धान के खेत में मेंढ़क प्राकृतिक कीट नियंत्रण का काम करता है।

  • यह खेतों में पाए जाने वाले कीटों जैसे टिड्डियाँ, कीट-पतंगे, मच्छर आदि को खाकर फसल की रक्षा करता है।

  • खास बात यह कि मेंढ़क की उपस्थिति से न तो मिट्टी बिगड़ती है, न ही पर्यावरण को नुकसान होता है।


फायदे ही फायदे:

  • कोई खर्च नहीं — पूरी तरह प्राकृतिक तरीका

  • कीटनाशक की जरूरत खत्म

  • जैविक खेती को मिलता है बढ़ावा

  • मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है

  • जलचर जीवों का संतुलन बना रहता है


किसानों के लिए सुझाव:

  • धान के खेतों में पानी को लंबे समय तक स्थिर रखें ताकि मेंढ़क स्वाभाविक रूप से आकर बसेरा बना सकें।

  • खेतों के चारों ओर जैव विविधता बनाए रखें ताकि मेंढ़कों को उपयुक्त वातावरण मिले।

  • कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग न करें, ताकि मेंढ़कों पर बुरा असर न पड़े।

खेती में कमाल की चीज़: महंगे कीटनाशकों को भी मात देती है ये देसी तरकीब!

खेती में ऐसे कई उपाय होते हैं जिन्हें बहुत कम किसान जानते हैं, लेकिन असर के मामले में ये किसी भी महंगे कीटनाशक को पीछे छोड़ सकते हैं। इन्हीं में से एक है [यहाँ उस सामग्री या नुस्खे का नाम डालें – जैसे गौमूत्र, नीम का अर्क, लहसुन-खीच, राख, छाछ आदि]

इसका उपयोग यदि सही तरीके से किया जाए, तो ये कीड़े-मकोड़ों का पूरी तरह से सफाया कर सकती है – वो भी बिना मिट्टी की सेहत बिगाड़े और बिना खर्च किए भारी-भरकम पैसा।

सही तरीका क्या है?
इसका असर तभी दिखेगा जब इसे [उपयोग विधि बताएं – जैसे पानी में घोलकर छिड़काव, मिट्टी में मिलाना, बीज उपचार, आदि] किया जाए। सही अनुपात और समय पर इस्तेमाल करना बेहद ज़रूरी है।

क्यों है ये खास?

  • यह पूरी तरह जैविक है

  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है

  • फसल की गुणवत्ता सुधारती है

  • लागत बेहद कम है

आज जब महंगे कीटनाशकों और रसायनों से किसान परेशान हैं, ऐसे में यह देसी तरकीब खेती में क्रांति ला सकती है – बशर्ते इसका तरीका सही हो और समय पर उपयोग किया जाए।





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