उत्तर प्रदेश का जौनपुर एक ऐतिहासिक शहर है। इसे 14वीं सदी में फिरोज शाह तुगलक ने अपने भाई 'जौना खां' (मोहम्मद बिन तुगलक) की याद में बसाया था। यह शहर गोमती नदी के किनारे बसा है। अपने सुंदर स्मारकों के कारण इसे मध्यकाल में 'शिराज-ए-हिंद' (पूर्व का शिराज) भी कहा जाता था। पौराणिक काल के बाद विद्वतजन जौनपुर को चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के काल से जोड़ते हुये ‘मनइच’ तक लाते है और तथ्य है कि यहॉ बौद्ध प्रभाव रहा है। भर एवं शोइरी, गूजर, प्रतिहार, गहरवार भी अधिपति रहे है। यहॉ मोहम्मद गजनवी के हटने के बाद 11 वीं सदी मोहम्मद गोरी ज्ञानचन्द संघर्ष में गोरी द्वारा जीत एवं अरूनी में खजाना भेजाना, 1321 ई0 में गयासुद्दीन तुगलक द्वारा अपने पुत्र जफर खॉ तुगलक की जौनपुर में नियुक्ति उसको वर्तमान शहर के र्निमाण से जोड़ती है। डेढ़ शताब्दी तक मुगल सल्तनत का अंग रहने के बाद 1722 ई0 में जौनपुर अवध के नवाब को सौपा गया। 1775 ई0 से 1788 ई0 तक यह बनारस के अधीन रहा और बाद में रेजीडेन्ट डेकना के साथ रहा। 1818 ई0 में जौनपुर के अधीन आजमगढ़ को भी कर दिया गया, लेकिन 1822 ई0 एवं 1830 ई0 में विभाजित कर अलग कर दिया गया।
1. ऐतिहासिक स्थल:
- शाही किला: 14वीं सदी में बना यह किला शहर का प्रमुख आकर्षण है।
- शाही पुल: अकबर के शासनकाल में गोमती नदी पर बना यह पुल एक अद्भुत इंजीनियरिंग का नमूना है।
- अटाला मस्जिद: इसे 14वीं सदी में शार्की राजाओं द्वारा बनवाया गया था और यह अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
- शीतला चौकियां धाम: यह यहाँ का एक बहुत प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है।
- माँ शारदा शक्तिपीठ (मैहर माता मंदिर) यह यहाँ का एक बहुत प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है।
- 3. शिक्षा, संस्कृति और भाषा:
- यह ज़िला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और कला के लिए जाना जाता है।
- शार्की काल (14वीं-15वीं सदी) के दौरान यह स्थान पूरे उत्तर भारत में कला, साहित्य और शिक्षा का बड़ा केंद्र था।
- एक बीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय एवं अनेको महाविद्यालय एवं स्कूल्स है।
- यहाँ की मुख्य बोलियाँ हिंदी, अवधी, और भोजपुरी हैं।
- 2. भूगोल और अर्थव्यवस्था:
- जौनपुर राज्य की राजधानी लखनऊ से लगभग 228 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
- यह शहर अपनी प्रसिद्ध इमरती मिठाई और सुगंधित इत्र के लिए पूरे देश में मशहूर है।
- यहाँ पर होटल, रेस्टूरेन्ट, कपड़ो के स्टोर्स एवं अन्य आधुनिक स्टोर्स है।
