महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) आर. बी. कमल ने बताया कि वर्षा ऋतु में जलभराव, गंदगी, दूषित पेयजल एवं मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं, बल्कि जनपदवासियों में रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाकर स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देना भी है। अस्पताल में आवश्यक प्रयोगशाला जांच, जीवनरक्षक एवं जरूरी दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी तथा आपातकालीन सेवाएँ पूरी तरह सक्रिय हैं, जिससे मरीजों को समयबद्ध एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए. जाफरी अस्पताल में की गई तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस, जापानी इंसेफेलाइटिस, वायरल फीवर, दस्त सहित अन्य मानसून जनित रोगों के उपचार के लिए पर्याप्त दवाएँ, जांच सुविधाएँ एवं चिकित्सीय संसाधन उपलब्ध हैं। वहीं, सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज सिंह ने बताया कि चिकित्सा महाविद्यालय के साथ-साथ शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (यूएचटीसी), रहूलाबाद में विशेष फ्लू क्लिनिक संचालित किया जा रहा है, जहाँ बुखार, खाँसी, सर्दी एवं अन्य संक्रामक रोगों के संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग एवं उपचार किया जा रहा है। साथ ही पोस्टर, बैनर, स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम, विद्यालयों एवं जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता, जलभराव रोकने, मच्छरों से बचाव, स्वच्छ पेयजल के उपयोग तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। "दस्तक" अभियान के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता एवं एमएसडब्ल्यू घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर जांच एवं उपचार से जोड़ रहे हैं। प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) आर. बी. कमल ने जनपदवासियों से अपील की कि वे अपने घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें, जलभराव न होने दें तथा बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेकर संक्रामक रोगों की रोकथाम में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
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